📜 नियम व आचार संहिता
“सदाचार, सेवा और श्रद्धा – यही हमारे मंदिर की पहचान है।”
श्री अर्जी वाले हनुमान मंदिर – सिद्ध पीठ, नेहरू नगर, भोपाल एक आध्यात्मिक और चमत्कारी स्थल है। यहां आने वाले प्रत्येक भक्त, साधक और सेवक के लिए कुछ आवश्यक नियम व मर्यादाएं निर्धारित की गई हैं, ताकि मंदिर की गरिमा बनी रहे और श्रद्धालु परम शांति और आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
🙏 मंदिर परिसर में पालन किए जाने वाले नियम:
- 1. श्रद्धा और आस्था के साथ प्रवेश करें
मंदिर एक सिद्ध भूमि है, कृपया चप्पल, जूते बाहर रखें।
गर्भगृह में प्रवेश से पूर्व मन, वचन और कर्म की पवित्रता आवश्यक है। - 2. स्वच्छता और मौन बनाए रखें
परिसर को स्वच्छ रखें।
तेज़ आवाज़ में बात न करें, मोबाइल का उपयोग सीमित करें।
गर्भगृह में मोबाइल से फोटो/वीडियो बिना अनुमति न बनाएं। - 3. नियमित दर्शन और अर्जी का अनुशासन
अर्जी केवल मंगलवार और शनिवार को लगाई जाती है।
अर्जी लगाने के बाद कम से कम 5 बार हाजिरी देना आवश्यक है।
भक्त स्वयं आएं, या WhatsApp के माध्यम से जानकारी भेजें। - 4. वस्त्र और आचरण में शालीनता रखें
पुरुष सफेद या साधारण वस्त्र पहनें।
महिलाएं गरिमामयी परिधान में आएं।
अपशब्द, बहस, तर्क-वितर्क वर्जित हैं।
📲 ऑनलाइन अर्जी से जुड़े नियम:
- WhatsApp द्वारा भेजी गई अर्जी में स्पष्ट रूप से: नाम + गोत्र + समस्या + स्थान लिखा होना चाहिए।
- अर्जी के लिए निर्धारित सामग्री (नारियल, कपड़ा, सुपारी आदि) की जानकारी मंदिर द्वारा दी जाएगी।
- झूठी, अपूर्ण या अपमानजनक जानकारी भेजना निषेध है।
🧘♂️ गुरुदेव के संबंध में विशेष नियम:
- गुरुदेव से मिलने हेतु विनम्रता, शांत मन और उचित समय का ध्यान रखें।
- बिना अनुमति किसी प्रकार की वीडियो रिकॉर्डिंग न करें।
- गुरुदेव किसी के घर भोज हेतु नहीं जाते, कृपया आग्रह न करें।
- साधना काल में गुरुदेव से मिलने का प्रयास न करें।
🎉 उत्सव एवं भीड़ के समय के दिशा-निर्देश:
- विशेष पर्वों जैसे: हनुमान जन्मोत्सव, शिवरात्रि, बसंत पंचमी, श्रावण सोमवार को दर्शन के लिए समयपूर्व आएं।
- महिलाएं, बुज़ुर्ग और बच्चों को प्राथमिकता दें।
- सुरक्षा व सहयोग हेतु मंदिर समिति के निर्देशों का पालन करें।
📖 दान व सेवा से जुड़े नियम:
- मंदिर में दान केवल अधिकृत स्थान या समिति के सदस्य को ही दें।
- ऑनलाइन दान के लिए वेबसाइट के “दान करें” पेज की जानकारी लें।
- सेवा कार्य स्वेच्छा से करें – कोई भी कार्य प्रदर्शन हेतु न करें।
🔔 निष्कर्ष:
यह मंदिर कोई दिखावे का स्थान नहीं, बल्कि सच्चे मन, श्रद्धा और साधना का सिद्ध स्थल है।
“मर्यादा में भक्ति – वहीं सिद्धि का द्वार खोलती है।”
